भ्रष्टाचार पर अंकुश कैसे लगाएं?

भ्रष्टाचार देश की अर्थव्यवस्था की प्रगति को धीमा कर देता है। जिसका खामियाजा हर ईमानदार नागरिक को भुगतना पड़ता है। भ्रष्टाचार हर क्षेत्र में कैंसर की तरह फैल गया है। अगर भ्रष्टाचार न होता तो देश का अच्छी तरह से विकास होता और सरकार की नीतियों से हर जरूरतमंद को फायदा होता, जिससे किसी भी गरीब का परिवार बेरोजगारी या कम आय के कारण भूखा नहीं सोता।


भ्रष्टाचार केवल न्याय प्रणाली और राजनीति तक ही सीमित नहीं है, बल्कि पूरे सरकारी तंत्र में फैल गया है। आइए संक्षेप में जानते हैं।


राजनीति– यहां भ्रष्टाचार का दोष राजनीति नहीं बल्कि राजनीति का दुरुपयोग करने वाले भ्रष्ट नेताओं का है। भ्रष्टाचार का सबसे बड़ा कारण राजनीति का दुरूपयोग करने वाले नेता हैं। सभी नेता भ्रष्ट नहीं होते, इसलिए अपने मताधिकार का सही उपयोग करके योग्य नेता का ही चुनाव करना चाहिए। तभी देश भ्रष्टाचार से मुक्ति की राह पर चलेगा।


सरकारी प्रणाली – इसमें सभी सरकारी कार्यालय, सरकारी विभाग, सरकारी स्कूल, सरकारी कॉलेज आदि शामिल हैं। आईएएस और आईपीएस की ताकत देश में शीर्ष पर मानी जाती है। उनके पास इतनी शक्ति है कि वे मिलकर भ्रष्टाचार पर लगाम लगा सकते हैं। लेकिन हर कोई ईमानदार और बहादुर नहीं होता। इसलिए भ्रष्टाचार पर नियंत्रण नहीं किया जा सकता। उन पर राजनीति का दुरूपयोग करने वाले नेताओं का दबाव होता है, जो भ्रष्ट नेताओं के हिसाब से काम नहीं करते, उन आईएएस और आईपीएस का तबादला कर दिया जाता है।

कुछ ऐसे आईएएस और आईपीएस  भी होते हैं जो अपना काम पूरी ईमानदारी, निडरता और पूरी लगन से करते हैं। उन्हें कई तबादलों का सामना करना पड़ता है। लेकिन फिर भी वे देश की सेवा करते हैं और भ्रष्टाचार के खिलाफ पूरी तरह से लड़ते हैं।


जब तक पूरे सरकारी तंत्र में कर्मचारियों, अधिकारियों का काम के प्रति ईमानदारी, निडरता और लगन नहीं होगा, तब तक भारत भ्रष्टाचार से मुक्त नहीं होगा। इसलिए अपने वोट के अधिकार का उपयोग करते हुए ईमानदार, निडर नेताओं को चुनना सबसे महत्वपूर्ण है, ताकि ईमानदार और निडर नेता आईएएस और आईपीएस की लॉबी को नियंत्रित करें।


जब ईमानदार नेताओं का आईएएस और आईपीएस लॉबी पर नियंत्रण होगा, तो आईएएस और आईपीएस का अपने अधीनस्थों पर नियंत्रण होगा। ताकि पूरी सरकारी व्यवस्था एक उचित व्यवस्था से चले और भ्रष्टाचार पर लगाम लगे।


न्यायपालिका व्यवस्था– भ्रष्टाचार ने न्याय व्यवस्था को भी अपनी चपेट में ले लिया है। जब राजनीति में ईमानदार नेता जनता द्वारा चुने जाएंगे तो पूरी सरकारी व्यवस्था में सुधार होगा, जिससे 80% दीवानी मामलों का निपटारा सम्बंधित ग्रीवेंस सेल में होगा। जिससे कोर्ट में मुकदमों का बोझ भी कम होगा और याचिकाकर्ता कम समय में निचली अदालत से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक अपना केस लड़कर आसानी से न्याय प्राप्त कर सकेगा। ग्रीवेंस क्या है?


हम सभी नागरिक भी कहीं न कहीं भ्रष्टाचार के लिए जिम्मेदार होते हैं। हम आसानी से कहते हैं कि राजनीति बहुत खराब है, लेकिन जब मताधिकार का समय आता है, तो अधिकांश लोग राष्ट्रीय हित को नहीं देखते हैं और अपने जातीय, वित्तीय और व्यक्तिगत हित को देखकर ही अपने वोट का उपयोग करते हैं। जो सिर्फ और सिर्फ भ्रष्टाचार को बढ़ावा देता है।

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