NewDelhi: पीएम मोदी चाहे विश्व के सबसे लोकप्रिय नेता बन गए हो, मगर अपने ही कार्यालय में भ्रष्टाचार को रोक नहीं पाते; कैसे होगा देश का पूर्ण विकास?

आज का हमारा विषय बड़ा ही गंभीर और महत्वपूर्ण है, जिसका शीर्षक है “किस तरह से हम सब भारतीय नागरिक एक होकर, अपने मौलिक अधिकार का प्रयोग कर, देश से भ्रष्टाचार को जड़ से उखाड़ फेंकने में अपना योगदान दे सकते है.” आप मेरे टॉपिक के शीर्षक से भली भांति परिचित हो गए होंगे और आपके मन में सवाल उठ रहा होगा कि हम सब भारतीय नागरिक एक होकर किस तरह से भ्रष्टाचार को जड़ से ख़त्म कर सकते है।

इस आर्टिकल को शेयर करना बहुत ही जरुरी

मेरे पास इस सवाल का बहुत ही सरल जवाब है, अगर आप सब इसमें अपना सहयोग दें तो हम जरुर भ्रष्टाचार को जड़ से उखाड़ फेंकने में कामयाब होंगे। अब आपके मन में फिर से सवाल उठ रहा होगा कि यह किस तरह का सहयोग होगा। मै हर भारतीय से बस इतना सहयोग चाहूंगा कि वे मेरे इस आर्टिकल को अधिक से अधिक लोगो को भेजे, जिससे सरकार तक पूरे प्रमाण के साथ यह गंभीर विषय पहुंचे और हमारे कानून में संशोधन हो, और यह तभी संभव होगा, जब हम सब एक होकर इस आर्टिकल को सरकार तक पहुचाएंगे। आइए जानते है, ऐसा क्या विषय है मेरे पास जिसको जानना सबके लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है।

भ्रष्टाचार की शुरुआत खुद प्रधानमंत्री कार्यालय से होती है(PMOPG/E/2017/0145520)


मै पिछले 20 सालो से भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई लड़ रहा हूँ, जिसमे मेने पाया कि सरकारी तंत्र में सबसे मजबूत और महत्वपूर्ण पद पर बैठे लोग ही सबसे ज्यादा भ्रष्टाचार को न केवल अप्रत्यक्ष रूप से छुपाते है बल्कि खुद भी भ्रष्टाचार करते है। जिसको सरकारी तंत्र में उच्च पदों में बैठे अधिकतर सरकारी अधिकारी अपनी एक लॉबी बनाकर खुलेआम अंजाम देते है। मैंने प्रधानमंत्री कार्यालय, राष्ट्रपति सचिवालय और प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग में भ्रष्टाचार की शिकायत की, जिसको अधिकतर आईएएस, आईपीएस और मंत्री की भ्रष्ट लॉबी द्वारा बंद कर दिया गया।

प्रधानमंत्री कार्यालय और राष्ट्रपति सचिवालय में जानबूझकर भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया जाता है

लेकिन मेरे 20 साल के भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई के कारण, मै जो प्रमाण तर्क के साथ रखता हूँ उसके कारण प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग को न चाह कर भी मेरी शिकायत को फिर से स्वीकार कर हिमाचल सचिवालय भेज दिया गया है। (DARPG/E/2023/0021295) इसमें हिमाचल के पूर्व मुख्य सचिव, वी सी पारखा का बड़ा भ्रष्टाचार है, मेरे लगातार शिकायतों और प्रयास के बाद उनके खिलाफ पुलिस जांच हुई, जिसके आधार पर ये केस 6 साल से पेंडिंग है. लेकिन अधिकतर आईएएस, आईपीएस और मंत्री के भ्रष्टाचार के कारण इसको बार बार गैरकानूनी ढंग से बंद कर दिया जाता है. हर बार बंद किए गए केस में प्रमाण को तर्क के साथ पेश करने के साथ, इस केस को सोशल मीडिया में शेयर करने का कारण देने पर केस को फिर से ओपन तो कर दिया जाता है, मगर इसमें जानबूझकर कोई कार्यवाही नहीं की जाती है।

केंद्रीय सूचना आयोग में भ्रष्टाचार पर कोई कार्यवाही नहीं

यह आम केस नहीं है, इसमें अधिकतर आईएएस, आईपीएस और मंत्री का इन्वोल्वमेंट है. मै क्रमानुसार शिकायत संख्या दे रहा हूँ आप लोग अधिक से अधिक इसे शेयर करें(PMOPG/E/2017/0145520, PRSEC/E/2021/16362, DARPG/E/2023/0021295), ताकि सरकार तक यह पहुंचे। जो भ्रष्टाचार ये अधिकतर आईएएस, आईपीएस और मंत्री कर रहे है, यह देश के हर क्षेत्र में हो रहा है चाहे न्याय का क्षेत्र हो या कोई भी सरकारी कार्यालय, हद तो ये है कि भ्रष्टाचार की यह प्रणाली निजी क्षेत्र में भी आ गयी है. मैंने इस विषय में प्रधानमंत्री कार्यालय में सुचना के अधिकार का उपयोग कर, केन्द्रीय सूचना आयोग में हियरिंग अटेंड करी लेकिन मुख्य सूचना आयुक्त ने भी इस भ्रष्टाचार को दबा दिया।

भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई के कारण नौकरी से धोना पड़ा हाथ

यह टॉपिक ज्यादा बड़ा नहीं हो इसलिए अपने विषय में ज्यादा न बोलते हुए बस इतना कहना चाहूँगा कि इन 20 सालो में मुझे अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ा, मेने जितना कमाया वो सब भ्रष्टाचार की लड़ाई में ही लगा दिया। मै क्रमानुसार शिकायत संख्या दे रहा हूँ, आप अधिक से अधिक इस आर्टिकल को शेयर करे, जिससे कानून में संशोधन हो और हमारा देश से भ्रष्टाचार जड़ से ख़त्म हो।(PMOPG/E/2017/0145520, PRSEC/E/2021/16362, DARPG/E/2023/0021295)